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Thursday, July 7, 2011

आखिर कब तक !!


_____________________आखिर कब तक____________________
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भारत की राजनितिक पार्टियों का वोट की राजनीति की खातिर लोकतंत्र का मजाक बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है और इसमें सभी दल एक जैसे ही हैं कोई नंदीग्राम में सना है कोई दिल्ली के सिख दंगो में तो कोई गुजरात और अयोध्या में .. महारष्ट्र में कोई साफ़ है दक्षिण भारत में ... पहले प्रदर्शन और विरोध का आतंक एक बड़े स्तर पर पर होता था मगर आज हालत बदल गए हैं !

कहा जाता है अपराध से घृणा करो अपराधी से नहीं, और उस परिस्थिति में जहाँ अपराधी अपराध की सजा पा ले वहा वह सामन्य जीवन का अधिकारी होता है---- बात हो रही है नीरज ग्रोवर हत्याकांड में सजा पा चुकी मरिया की .. जो अब अपने जीवन को सामन्य जीने के लिए संघर्षशील है !
लेकिन अब उसको सामने जीवन जीने का अधिकार नहीं दिया जायेगा ये कहना है इस ज़माने के नए खुदाओ का .......

आज सवाल उठता है की राजनितिक पार्टियां संविधान और न्यायव्यवस्था से ऊपर है ? हर बात को वोट की राजनीति से जोड़कर लोगो को आतंकित करना इन खुदाओं का नया चलन है यहाँ सवाल ये नहीं की मारिया का गुनाह कितना बड़ा या छोटा था निसंदेह मारिया ने बुरा कार्य किया और सजा पायी लेकिन जब वो न्यायालय द्वारा सजा पा चुकी है तो क्यों उसको सामन्य जीवन जीने के लिए आतंकित किया जा रहा है ..?

मात्र राम गोपाल वर्मा द्वरा उसकी कहानी पर फिल्म बनाने की घोषणा से जिस प्रकार भारत के एक राजनितिक दल ने प्रदर्शन किया है और जंगलराज की स्थिति पैदा की है सवाल उठता है क्या ये अपराध नहीं है ?

इस देश में न्याय और व्यवस्था के प्रहरी ही जब न्याय का निरादर करते हैं और वो भी इतने बुरे प्रतिक्र्यात्मक तरीके से ..व्यक्ति विशेष के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं तो आखिर क्या समझा जाये वो जनता को क्या सन्देश देना चाहते हैं की अब वही सबसे बड़े न्यायालय बन चुके हैं और देश में जंगलराज चुका है अगर उन खुदाओं की नहीं मानी गयी तो तोड़ फोड होगी धमकियाँ मिलेगी , शायद जान से भी मारा जा सकता है !

इस देश में जबकि सरकार निरंतर भ्रष्टाचार में लिप्त थी तब तो मुख्य विपक्षी दल उससे बहस करने उसे घेरने की बजाय संसद नहीं चलने देकर उसकी मदद ही कर रहे थे .. आज व्यक्ति विशेष के खिलाफ कितने उर्जावान हैं !

आज हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल है की राजनितिक दलो का कोई नैतिक आचरण होगा भी या नहीं होगा ... सवाल मारिया का नहीं है क्योंकि चार दिन में ये भी खत्म हो जायेगा .. सवाल है की आखिर कब तक हम इस जंगलराज और वोट के राजनितिक तमाशो के मूकदर्शक बनकर सहते रहेंगे !

सवाल बीजेपी कांग्रेस बसपा समाजवादी वामपंथी या अन्य दलों की विचारधारा के समर्थन या विरोध का नहीं है क्योंकि एक विशेष परिस्थिति में सभी दल एक जेसा ही व्यवहार करते हैं .. यहाँ सवाल है की ▬▬▬ "कब तक नए ज़माने के ये खुदा न्याय और व्यवस्था का मजाक बनाते रहेंगे ...कब तक न्याय की देवी यूँ ही आँखों पर पट्टी बांधे रखेगी ??"
सवाल तो न्याय और व्यवस्था के प्रति इनकी टूटी हुई आस्था का है !

__________________________​_ मीतू !!__ ७ जुलाई २०११ रात्रि १०:३०

Sunday, June 5, 2011

लरजती आस्था !

अभी नव वर्ष ने दस्तक ही दिया था तभी मेरे स्वास्थ्य ने मुझे अस्पताल का रास्ता दिखा दिया ..... सर पर कुछ कर जाने का जूनून लिए मैं खुद से लडती रही .... एक बार तो यूँ भी महसूस हुआ की अब मैं न बच पाउंगी .... यूँ अनाम मौत मरना भी न चाहती थी ...... ढेरो चेक-अप हुए , एक-एक कर के सारे रिपोर्ट नार्मल आये .... आँखों में चमक बढती गई और ईश्वर पर आस्था भी !

फिर शुरू हुआ पुस्तकालय का चक्कर , पुस्तको की बड़ी-बड़ी अलमारियो में शीर्षक को घूरती हुयी दो आँखे .... अपने मतलब की पुस्तक को तलाशती हुई मेरी खोजी नज़रे ... दुनिया के ढेर सारे रास्तो में से इन किताबो के सहारे अपनी मंजिल को ढूंढने का फिर से प्रयास करने लगी !
घर में आये हुए एडमिट कार्ड्स , काल लेटर्स बड़ी हसरत से मेरी और तकते रहते थे ........ उन सारे लेटर्स की सभी तारीखे अपनी डायरी में करीने से लिखकर ट्रेन/वायुयान में रिजर्वेशन करा लिया गया था !

मार्च से लेकर अब तक ज्यादातर समय प्रवास में ही बीत रहा है , समयाभाव और रिजर्वेशन की मुश्किल के चलते मुझ निहायत साधारण लड़की का सफ़र ट्रेन की बजाय सफ़र वायुयान में हो रहा है ..... उड़ान एक आकाश से दुसरे आकाश तक !
अचंभित कर रही है ये तरह-तरह के कम्पनियो की फ्लाइटे , उनके एयर होस्टेस एवं होस्ट और उनका मशीनी व्यवहार !

पिछले माह मेरा इम्तहान एक छोटे से शहर में था , रहने की व्यवस्था उस शहर के महराजा के महल को खरीद कर बनाए गए होटल में थी ....रात १० बजे मैं होटल में पहुँच गई ...... लगभग ४८ घंटे का प्रवास था ! मन तो था की उस महल के बचे हुए अवशेष को नजदीक से जाकर देखू , उनकी दीवारों को छूकर उस समय की भव्यता को महसूस करू ! रात भर नींद न आई , अलसुबह कमरे की नकली ठण्ड वाली एयर कंडिशनर से निकल कर प्रकृति के बीच चहलकदमी करने के लिए बाहर निकल आई .... अभी बारिश ही हुई थी , सारी सड़के , पेड़-पौधे भींगे हुए थे .... होटल के सामने ही एक तालाब था जिसके बीच में टापूनुमा बनाकर उसमे पेड़-पौधे लगा दिए गए थे.....(क्रमशः )

Saturday, February 19, 2011

फेसबुकिया संघ !!

आज "जय श्री राम " और "अल्लाह हु अकबर" का प्रयोग किसी भक्ति पूजा इबादत के लिए नही बल्कि नारे के तौर पर हो रहा है ....... जाने कहा गए वो कवी गीतकार या देशभक्त जो कभी लिखकर मर गए की ....... "मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना" !

कभी बचपन में देखा था मैंने की अक्सर दादी अपने खाली क्षणों में एक कापी पर "जय श्री राम" तुलसी के पत्तों पर चन्दन से "राम-राम" लिखा करती थी , आज भी मेरी नानी सारा दिन "राम-राम" लिखा करती है और सात्विक जीवन जीती है .....किन्तु आज फेसबुक पर देखती हूँ की "जय श्री राम" ऐसे प्रयोग किया जाता है की जैसे वे शब्दों से ही लोगो को डरा देंगे ...........खिलवाड़ बना रखा है अपने अराध्य के नाम का भी इन तथाकथित फेसबुकिया राम भक्तो ने .....!!

मेरी सारी शिक्षा संघ के स्कूल में हुयी .... संघ को शुरू से ही माना है मैंने उसको बहुत सम्मान दिया है किन्तु अब फेसबुकिया संघ कि दुर्दशा देखकर दुःख होता है !

फेसबुकिया संघ तो अब जैसे नए -नवेले छछुन्दरो का गढ़ बनता जा रहा रहा है ...... यहाँ के शोहदे लडकिया छेड़ते है , उन्हें धमकी देते है और उनके साथ बदतमीजी करते है और संघ के वरिष्ठ लोग उन्ही शोहदों को गर्व से प्रश्रय देते है .....अगर ऐसे गधो के बारे कुछ बोलो भी तो कुछ तथाकथित संघी नौटंकी छाप देशभक्ति के मुखौटे लगा कर दल- बल सहित खड़े हो जायेंगे कहेंगे की लड़की को छेड़ना देश भक्ति के आड़े थोड़े ही आता है.....और अजी हम तो ऐसे नही है , आप एक के कारण सभी को ऐसा कैसा कह सकती है ......दूसरा यह भी की उसके विचार तो देश के लिए बड़े अच्छे है .... ...... मेरा तो ऐसो को यही जवाब है की "अजी अगर आप ऐसे नही है तो मुझे यहाँ दल-बल के साथ मिलकर समझाने के बजाये अपनी उर्जा इन छछुन्दरो को भगाने में क्यों नही प्रयोग करते ??'

हो सकता है की ये देशभक्त लोग यह भी मुझे कहे की हम ये छोटी-मोटी सुलझाने के लिए नही है ...... अजी हमें तो बड्डी-बड्डी समस्या सुलझानी है ..... देखती नही की सोनिया आंटी देश का सारा पैसा लेकर भागी जा रही है और आप कह रही है की लडकियों को छेड़ने से बचाओ .!

मैंने देखा है की किसी और संघठन में अगर किसी को कुछ हो जाता है तो संगठन के अन्य सदस्य उसके परिवार पर पूरा ध्यान देते है किन्तु अगर संघ कार्य में सम्मिलित में किसी संघी को कुछ हो जाए तो संघ के बाकी सदस्य तो उसके दरवाजे झाँकने तक नही जायेगे और दस लांछन उस परिवार पर और जड़ देंगे ताकि वह परिवार उनसे मदद की उम्मीद भी न कर सके ....... क्या ऐसे घिनौने आचरण के बदौलत ही अखंड भारत के निर्माण का स्वप्न देखा जा रहा है ?

शायद ऐसे ही लोगो के बदौलत आज संघ की ये दुर्दशा है !!

__________________________________मीतू Copyright ©

Thursday, February 10, 2011

खेल शराफत का !!


वो एक शरीफ आदमी है , बस दूर से ही स्त्रियों को घूरता रहता है , भीड़ भरे जगह पर अपने कंधे महिलाओ के कंधे से रगड़कर निकल जाता है , लेकिन इससे शराफत का क्या लेना-देना , ये सब करने से शराफत में कौनो कमी थोड़े ही आ जाती है ..... अपनी बीबी को घुमाने ले जाता है , बच्चो को पूरा प्यार देता है .... पड़ोसियों से अच्छा व्यहार रखता है .... उसके खिलाफ कोई कही शिकायत भी नही है .... अब नज़रे है थोड़ी बहुत मचल जाए तो इसमें ओकर का दोष , ई तो आजकल ही लडकिया ही है जो की कमबख्त मारी ऐसा ड्रेस पहन कर निकलती है .....कि आँख और दिल कुछ काबू में ही नही रहता ............!!

अब उ शरीफ आदमी कि तनिक शराफत देखिये जब भी बालकनी में खड़ा रहा और नीचे सड़क पर से अगर कोई सुन्दर कन्या निकल गयी तो जब तक वो ओझल न हो जाए आँखे उसी कि और टकटकी लगाए देखती है अगर पत्नी टोक दे तो उ का है न कि लडकिय इतनी बन-ठन के निकली रही निगाह ओसे हटते नाही रहा ,... ससुरी ज़माना ही खराब है ... अब इन लड़कियन के कौन समझाए .....

हमारे एक ममेरे भाई है, बहुतय शरीफ है , आज से करीब १५-१६ वर्ष पहले कि बात है ................. Boys High School , Allahabad में निर्णय हुआ कि इस वर्ष कामर्स कि क्लास को-एड चलेगी ...... दे दना दन लड़कियन का एड्मिसन भया ....उहाँ पढ़े वाले लड्कवन के तो जैसे फ़ोकट में लाटरी लगी गयी ..... कल तक जे नहा के नै जात रहा अब उ सेंट-पाउडर लगा के स्कूल जाए लगा ।!

अब कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े वाली लडकिया , को-एड हुआ तो का हुआ उ कोई हमरे तरह मूरख गंवार थोड़े ही थी जो पूरा कपडा पहिन के स्कूल आवे , मिनी स्कर्ट पहिनने में स्मार्टनेस जो आती है ! हमरे भईया तो जैसे छुट्टी कि घंटी बाजत रही राकेट के जैसे भाग के सीढ़ी के नीचे आकर शराफत से खड़ा हो जाते थे ...... उ का रहा न जब ऊपर सीढ़ी से मिनी स्कर्ट पहिन के लड़कियन नीचे उतरत रहीं तो नीचे से उनकर टांग देखे के आनंदे कुछ अउर आवत रहा ...... अउर एहमे शराफत में कमियों नाही आवत रही !!

एक बार भैया छत पर पर खड़े थे ... बगल के ही छत पर २-३ लडकिय अउरो खड़ी थी उनको देखकर भैया को जाने का सूझी कौनो गाना - साना गुनगुनाई दिए और कुछ अश्लील इशारा भी कर दिए .,, मुहल्ले की बात रही , घर पर आ गया ओरहन ..... मामा ने तो समझा दिया अच्छे से ओरहन देने वाले को कि उनका बेटवा बहुतय शरीफ है बेहतर होगा कि आप अपने बिटिया को घर से बाहर न निकाले ... लड़का जवान हो रहा हो रहा है ,काहे रखते हो अपनी बिटिया को ऐसे कि हमारे बेटवा का दिल मचलने लगे.... ??..

अगर कभी हमारे उ भैया को किसी लड़की को अपने बाईक पर बैठाने का मौका मिल जाता था , तो गाडी में इतने ब्रेक लगते थे की पूछिए मत , और उन्हें हर स्पीड ब्रेकर पर अपनी बाईक चढ़ानी जरुरी होती थी ..... लेकिन भैया हमारे निहायत शरीफ थे !!

हमारे एक अंकल जी है , उ भी बड़का वाले शरीफ है .... बस होली वाले दिन तनिक बौरा जाते है .... कालोनी भरे की भौजायिन से बड़ी पटती है उनकी .... होली के दिन तो उनका शराफत वाला रंग देखते ही बनता है !

पिछले होली की ही बात है सारे कालोनी वाले आपस में होली खेल रहे थे , मैं भी अपने छत पर खड़ी होकर कालोनी की होली का आनंद ले रही थी .....चौराहे पर बड़ा सा रंग भरके ड्रम रखा था ... अचानक उ वाले अंकल जी उठे और महिलाओ की टोली में सबको रंग लगते-लगते एक आंटी जी का हाथ पकड़कर घसीट लाये ... पाहिले तो आंटी जी (उनके हिसाब से भौजी) और अंकल जी एक दुसरे को रंग लगाये अचानक हम देखते का है __ ए भईया ' , अंकल जी ने तो आंटी जी को कीचड में धम्म से पटक दिया अउर लगे इहाँ-उहाँ जाने कहाँ-कहाँ रंग लगाने.... हम तो दंग रह गए अंकल जी की ई शराफत देखकर ..... तबहिन हमारी अम्मा जी अंदरे से बेड पर बैठी-बैठी चिल्लाई " चल मितुआ अन्दर , नही तो हम भेज रहे है पापा को ऊपर ",.... काजनी कहाँ से उनकी कौन सी तीसरी आँख है जो की घरे के अंदरे से बैठे - बैठे पता लग जाता है कि उनकी बिटिया का देख रही है ...!!

फिलहाल हम चुपचाप नीचे कमरे में आ गए , इससे ज्यादा शराफत देख नही पाए .... कालोनी में एक अंकल जी माईक लेकर अपनी बेसुरी आवाज में गा रहे थे " होली खेले रघुबीरा बिरज में, होली खेले " और उ वाले अंकल जी की शराफत हमारे आँख के आगे बहुत दिनों तक नाचत रही !!

एक भईया थे हमारे पड़ोस में बहुतय शरीफ , उनके पढाई के चर्चे दूर-दूर तक थे ,उनके कोई बहन नही थी हर साल हमसे राखी बंधवाते थे और इस रिश्ते से वे अक्सर हमारे घर आते थे ..... प्यार वो हमसे करते थे लेकिन बड़े ही प्यार से वे हमारी सहेलियों को ताका करते थे ......अब लगातार ताकने भर से कोई शराफत थोड़े ही कम हो जाती है .... एक दिन बड़ा गुस्सा आया और हम हाथ जोड़ लिए ऐसे रिश्ते से !

आजकल शराफत है क्या ? अपनी परिवारी जिम्मेदारियों को पूरा करना , समाज में घुल-मिल कर रहना ... अपने कार्य क्षेत्र में निपुण होना ... वो तो ये सारे लोग कर ही रहे है !

दरअसल अब शराफत शब्द का दायरा व्यापक हो गया है देख लीजियेगा कहीं इसके पड़ताल के बहाने आपको अपने गिरेबान में झाँकने की जरुरत तो नही ??? मीतू ०६०९२०१० सायं ८:०३ Copyright ©

दिनांक १०-२-११ अपरान्ह २:३०

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Sunday, February 6, 2011

आज के सन्दर्भ में बुरके का औचित्य !


कुरान में कहा गया है कि____

एक औरत को अपनी सुन्दरता का प्रदर्शन नही करना चाहिए . इनको ऐसा कपडा पहनना चाहिए जो इनको सर से पैर तक ढक सके जिससे इनकी खूबसूरती किसी को न दिखाई दे सिवाय उस औरत के पति, बच्चों, पिता, ससुर, भाई, भाई के बच्चों, बहन के ...बच्चों, नारी जाती या ऐसे पुरुष जो उस औरत से काम-भावना न रखता हो !(कुरान सुरा नूर अध्याय: प्रकाश. 31 कविता)

मैं हालांकि सभी धर्मो का बराबर सम्मान करती हूँ किन्तु जब मैं अपने धर्म की अच्छाइयो -बुराईयों पर वाद-विवाद करती हूँ तो आज मेरे मन में बुर्के के औचित्य को लेकर कुछ अनसुलझे सवाल है जिसे मै अपने इस पोस्ट के माध्यम से अपने मित्रो से पूछना चाहूँगी ….आप सभी से यह गुजारिश है की मेरी इस बात को कृपया धर्म से जोड़कर न देखें.

मैं कुछ उदाहरण आपलोगों के सामने फोटो के साथ व् कुछ समाचार पत्रों से मिली जानकारी एवं कुछ अपने अनभुव सांझा करती हूँ फिर आप बताइये की क्या उसका औचित्य आज भी आज भी वही है जो पूर्वजो ने सोचा था ..?? आज के असुरक्षित समय में क्या बुरका पहनना वास्तव में सुरक्षित है ??

____हाल ही में लालगढ़ में माओवादी आतंकवादियों की रैली में पहुंची ममता बैनर्जी की सभा से भी एक ऐसे ही अपराधी को कब्जे में लिया गया जो खुद को बुर्के में छुपाकर अपनी गतिविधी को सुरक्षाबलों की नजरों से बुर्के के सहारे छुपा रहा था।

____काबुल में भारतीयों पर हमला करने वाले मुस्लिम आतंकवादी भी अपने विस्फोटक बुर्के में छुरपाकर ही लाए थे। जिसमें भारतीयों को जानमाल का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

____मुंबई के वीएन देसाई अस्पताल से 2 महीने के बच्चे की चोरी के मामले में पुलिस को सीसीटीवी फूटेज से एक अहम सुराग हाथ लगा। पुलिस को पता चला कि बच्चा चुराने में बुरका पहने महिला का हाथ है !इससे पहले लोकमान्य तिलक अस्पताल में भी एक बुर्का पहने व्यक्ति ने 4 दिन के बच्चे की चोरी की थी।पिछले वर्ष फरवरी महीने में सायन के बीएमसी अस्पताल से एक 10 दिन के बच्चे को चुराकर ऐसी ही एक महिला फरार हो गई थी जिसका आज तक पुलिस पता नही लगा पाई है और इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर बीएमसी को लापरवाही रवैए के चलते इस बच्चे के मा बाप को 1 लाख रूपए का हर्जाना भी भरना पडा है।

___गीत निर्देशक हिमेश रेशमिया ने मंगलवार रात बुर्का पहनकर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत की और मन्नत मांगी !

हिमेश रेशमिया ने भीड़ से बचने के लिए बुरके का इस्तेमाल किया !

गौरतलब है कि दिसंबर महीने में ऐश्वर्या राय ने भी बुर्का पहनकर दरगाह की जियारत की थी।

___इंदौर. सियागंज में बदमासो ने बुर्का उठाकर इन्दर नाम के बन्दे को गोलियां दागी,वे पुलिस को चकमा देने के लिए बुरका पहन रखे थे !

_______मेरी एक परिचित मुस्लिम लड़की है मैंने देखा है की वो आराम से बुरके की आड़ में कालेज समय में अपने पुरुषमित्र के साथ निडर होकर बाईक पर बैठकर घूम आती है उसने मेरी एक सहेली को भी ऐसा करने की सलाह दिया ! अब मेरी सहेली का मित्र भी अपने बाईक के डिग्गी में बुरका रखता है और जब जी चाहता है उसे बुरका पहनाकर आराम से बाहर ले जाता है !

____ अभी पिछले वर्ष ही दिल्ली के करोल बाग़ के एक ज्वेलरी की शॉप से तीन बुर्के वाली महिलाओ को जेवर चुराते हुए धरा गया !

अब आप इन घटनाओ को देखते हुए बताइए की क्या सच में कुरआन में जो बुरके को लेकर लिखा गया है वो मकसद पूरा हो रहा है ?

कही बुरके की आड़ में अश्लीलता और अपराधिक घटनाओं को अंजाम तो नही दिया जा रहा है ?

बुर्के की आड़ में बढती हुयी अपराधी घटनाओ को देखते हुए बेल्जियम और फ्रांस के बाद अब यूरोपीय देश जर्मनी में बुर्के पर प्रतिबंध की ओर बढ़ रहा है। जर्मनी के एक प्रांत हिस्से में महिला सरकारी कर्मचारियों के बुर्का पहनने पर पाबंदी लगा दी गई है।

फ़्रांस में कुछ महिलाओं ने खुली टांगो के साथ बुरका पहनकर बुर्के का मजाक उड़ाया खैर उन्हें तो शर्मो-हया से कोई लेना देना ही नही है किन्तु उनको क्या कहेंगे जब कोई औरत खुद को मुसलमान भी कहती है और बेहिजाब भी रहती है एवं बुर्के की आड़ में अश्लीलता भी फैलाती है !

महिलाओं के खिलाफ इस्लामिक रुढ़िया सर चढकर बोलती हैं। पुरुष नमाज़ पढने के साथ-साथ गैर इस्लामिक हरकत कर सकता है। शराब पी सकता है, गलत ढंग से दौलत अर्जित कर सकता है, पर स्त्री पर गलत नजर डाल सकता है, पर उस पर इस्लामिक रुढ़िया काल नहीं बनती। आखिर महिलाओं को ही रुढ़ियों का शिकार क्यों बनाया जाता है।आखिर कब तक महिलाओं को मजहबी रुढ़ियों का शिकार बनाया जाता रहेगा ? अब वक्त आ गया है की वक्त के साथ कदम मिलकर चला जाए , इन बेमतलब के सड़े-गले रुढियो से हमारे समाज को मुक्त किया जाए !

बुर्के की वजह से आज हमारे देश और समाज को बहुत नुक्सान हो रहा है और आगे भी नुक्सान होने की सम्भावना है इस बारे में हमारे बुद्धिजीवी मुस्लिम बंधुओ को देश और समाज के हित में गंभीरता से विचार करना चाहिए !! भारत कि मुस्लिम महिलाये पाकिस्तानी या अफगानिस्तानियो से अधिक अच्छा बौद्धिक स्तर रखती है , उनको आवश्यकता है कि इन रुढिवादी धारणाओ को त्याग कर अपने विकास पर ध्यान दें !!

नोट :- मित्रो से अनुरोध है की वे भी बुरके के बारे में उदाहरण समेत अपने विचार रखे !!

________________________मीतू Copyright © 07022011

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Wednesday, February 2, 2011

उधेड़बुन ...कुछ यूँ ही !



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नही नही .... कुछ नही .... कुछ भी नही ..... शायद खामोश रहना ही अच्छा है ..... लेकिन इस ख़ामोशी के आवरण में मेरा दम घुट जाए ..... क्या करू ..... तुमसे कहू ..... तुम वो तो नही ...... तुम मेरी हो के नही ....... चलो मान लेती हूँ उनकी बात ........ लेकिन कहाँ ले जाऊं अपने दिल के ज़ज्बात .... कशमकश में हूँ ..... किससे कहू .... कैसे चुप रहू ..... कही मैं कर्ण तो नही ....... कहीं मैं दुर्योधन के शरण में तो नही ...... लेकिन उसके शरण में तो मृत्यु है ..... तो क्या जिंदगी मेरे अपनों के हाथ है ..... क्या सच में वे अपने मेरे साथ है ....... लेकिन विश्वाश्घात तो विश्वासपात्र ही करते है ...समझाओ मत मुझे रिश्तो के दर्शन ...... जानना भी नही चाहती ..... क्या कहू .... क्या करू ..... पहले तुम्हे समझ लू फिर साथ चलू ...... कभी धूप निराकार .... कही सपनो ने लिए आकार .....आज जो तुमने कहा ... उसने भी मुझसे कहा था कभी ...... फिर जाने वे शब्द कहाँ खो गए .... शायद मेरी नींद में सपने सो गए ..... अब नही यकीन सपनो पर .... चलो आओ हकीकत में तुम .... इब ख्वाबो से बाहर .... चलो तलाशे कोई ऐसी जिंदगी ..... जहां तुम्हे कोई गम हो ..... जहा मेरी आँख नम हो ..... क्या मिलेगी कहीं मेरे हिस्से की वो जमीन .. क्या करूँ .... तू ही बोल ..... खामोश कैसे रहूँ ..... घुटी साँसों के बीच आवाज़ भी तो नही निकलती है ......नही नही ...कुछ नही ....... कुछ भी नही ...!.????__________मीतू !!
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Monday, January 31, 2011

नारी तू देवी है !



1- यह वीभत्स फोटो शरिया के अंतर्गत दी जाने वाली सजा का है महिला का कसूर सिर्फ इतना था की उसने किसी से प्यार करने का जुर्म किया था !

२-यह फोटो है , सेंधवा मझोली ब्लॉक की बेवा रामकली की इन्हें टुहनी करार देकर देवर के बच्चे को जिन्दा करने के ...लिए कहा गया और उनके माथे पर बड़ा चीरा लगाकर उसमें चावल का चूरा और कुमकुम एक महीने तक भरा गया !आज भी उनकी जमीन पर देवर बच्चू सिंह और अजय सिंह ने कब्जा कर लिया है। अपनी अजिविका के लिए भटक रही रामकली को आज भी न्याय नहीं मिला

३- उदयपुर में सायरा थाना क्षेत्र के नांदेशमा में वृद्ध विधवा गणेशीबाई को डायन बताकर उस पर अत्याचार किया गया !

४- मां के कथित डायन होने का खामीयाजा उसके बेटे को अपनी जान चुका कर देनी पड़ी और इस मामले में एक युवक की हत्या आज इंट से उसके सर को चुर कर कर दिया गया। युवक की पहचान नालान्दा जिले के सिंधौल निवासी युगेश्वर मिस्त्री के रूप में किया गया।

५- जांजगीर-चांपा ज़िले के शिवनी गाँव में एक लड़की के जल जाने की घटना के बाद लोगों ने इसके पीछे डायन होने की बात कही और फिर ओझा को बुलाया गया.ओझा ने जहरीली जड़ी बूटियों का एक घोल बनाकर 30 महिलाओं को दिया और उन्हें ये घोल पीना पडा ताकि ये साबित हो कि वो डायन नहीं हैं. उनमे से कई महिलाओ की हालत चिंताजनक है !

६- झारखंड में महिला को डायन करार देकर उसे पेड़ से बांधकर उसकी पिटाई की गयी बाल कटा गया और अग्नि स्नान भी करा दिया गया !

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___ एक को छोड़कर सारी तस्वीरे हिन्दुस्तान की है जहां पर स्त्री को देवी का दर्ज़ा दिया जाता है ! कहने को तो अब यह भी कहा जाता की अब स्थिति सुधर रही है किन्तु ये सारी तस्वीर २०१०-११ की ही है !

हमारा देश भी स्त्री के मामले में तालिबान से कही कम नही है ,यहाँ भी मजलूम औरतो पर लगातार जुल्म ढाया जाता रहा है किन्तु तथाकथित हिन्दू समाज के ठेकेदार बनने वाले संगठन में से कोई भी इनकी मदद के लिए आगे नही आता ..... गाँवों में चुड़ैल बताकर मार डाली जाने वाली औरतें, मानसिक रोगों से ग्रस्त,मातों-जागरातों में सिर पटककर झूलने वाली औरतें, वृंदावन में आलुओं की तरह ठुंसी विधवाएं, दंगों-पंगों में रोज़ाना बलत्कृत होती दलित औरतें, इन सबको देखकर इन्हें अपनी संस्कृति पर ज़रा भी शर्म नहीं आती !? स्त्री के नाम पर इनका ज़मीर सोया ही रहता है और ये आते भी कैसे ये सारे जुल्म ढाने वाले मर्द ही तो है .... जिन्होंने स्त्रियों को भी देवी के नाम पर फुसलाकर मानसिक रूप से गुलाम बना रखा है और उन्हें भी इस कुकर्म में अपने साथ मिला लिया है !

अभी स्त्री हक़ की बात करो तो मुहल्ले के चुन्नू / गुड्डू / मुन्नू भी दांत दिखाते हुए बोलेंगे की बना तो दिया गया है तुम्हारे लिए कानून .. किन्तु कोई ये बताएगा की दहेज़ का कानून बनने के इतने सालो बाद भी क्या हमारा समाज इससे मुक्त हो पाया है ?
स्त्री के ऊपर बने कानून के दुरूपयोग होने की बात तो उठाकर ख़तम करने की मांग उठाने वाले ये बतादे की क्या किसी और कानून का दुरपयोग नही होता
फिर इसी कानून के लिए ही इतना हो हल्ला क्यों ?? सिर्फ इसलिए की ये स्त्री हक़ के लिए है ?
मुझे यह समझ में नहीं आता कि ये कौन होते हैं हमें बताने वाले की हमें क्या पहनना चाहिए औइर कैसे रहना चाहिए जब इनकी पोशाकों / रहन-सहन पर आपत्ति नहीं करते तो इन्हें क्या अधिकार है कि सारे देश के लोगों के लिए खाने-पहनने-नाचने का मैन्यू बनाएं। हम सबके बाप-दादा देश का पट्टा क्या इन्हीं सब उजबकों के नाम लिख गए थे !?

कब इमानदारी से कोशिश हुयी हमें आर्थिक और सामजिक समानता दिलाने की ? आज इन संगठनो द्वारा अपनी संस्कृति को बचाने के नाम पर जो कुछ भी प्रयास चल रहे होते हैं,उन पर गौर करें तो उनमें से सत्तर से अस्सी फीसदी प्रयास नारी को देवी के तौर पर बनाए औऱ बचाए रखने के लिए किए जाते हैं।
किन्तु ऊपर के घटनाओं को देखकर क्या ऐसा नही महसूस होता की भारतीय संदर्भो में स्त्री की दुर्दशा को देखते हुए उसे देवी कहा जाना बिल्कुल ऐसा ही है जैसे कि एक मुहावरे के अनुसार किसी को पोदीने के पेड़ पर चढ़ाकर उससे अपना काम निकलवा लेना ।
अब वक्त आ गया है की सरकार हमारे लिए भी कोई कदा कानून बनाये और उनका कड़ाई से पालन हो जिस देश में पशुओ के लिए कड़े कानून है क्या उस देश की महिलाओं की इतनी भी औकात नही की उनकी भी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बने ? ________________________मीतू Copyright © ३१ ०१२०११ .__२१:१५
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Sunday, January 30, 2011

अंतरजाल की दुनिया से !

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कभी दिल कहता है की अपने ज़ज्बात आप सभी से सांझा करू , फिर ये एहसास भी होता है की जरुरी तो नही की जो मैं सोचु वही मेरे आस-पास के लोग भी सोचे .!

इस आभासी दुनिया में मुझे बहुत से सच्चे रिश्ते भी मिले जिन्होंने मुझे दिल से प्यार दिया तो कही कोरी लफ्फाजी भी दिखी ! मैं एक अंतर्मुखी लड़की जो की सिर्फ दिल से सोचती है धोखा न मिले इसलिए तथाकथित मित्रो से हमेशा दूर ही रहती .!!

ऐसे में मुझे यहीं पर एक ऐसी सहेली भी मिली जिसको मैंने परछाई की तरह पाया जरुर लेकिन वो मेरे हाथो की पकड़ से हमेशा बाहर रही ! वो जब चाहती मुझे कॉल करके घंटो बात करती किन्तु जब मैं उससे बात करना चाहती कभी भी बात नही हो पाई ........उसने मुझे आइना दिखाया किन्तु उसकी झलक कभी नही देख पाई मैं ...... बहुत प्यार करते थे हम एक दुसरे को ...... दिल से उसने मुझे समझा , मुझे भी उसे पाकर ऐसा लगा की शायद मेरी मित्रता की तलाश पूरी हुयी .!
आज वो जाने कहाँ गई मुझे विश्वास दिलाकर की हम जल्द ही वास्तव में मिलेंगे !!

शुरुवात में एक साथी भी मिला इसी अंतर्जाल की दुनिया में ही ...... बातो का जादूगर था वो , सिर्फ बात ही बात थी उसके पास . खुश रहती थी मैं उस "बात गुरु" से भी ...... लेकिन एक बेचैन ह्रदय पर बातो का जादू भला कब तक तक चलता भला , लिखना भी बाधित हो रहा था .....मन ऊब गया और मैं उसे बाय-बाय कर चैट विंडो पर सभी के लिए परमानेंट चिटकिनी लगाकर करके फिर से अपने अध्ययन की दुनिया में आ गयी !

जिंदगी के थपेड़े खाया हुआ मेरा एक डरपोक किन्तु काफी समझदार /बुद्धू मित्र मुझे अक्सर समझाया करता की वास्तविकता में जीना सीखो ......... उस मित्र को मैं फेसबुक की उपलब्धि कह सकती हूँ मैं ........ रोज मेरा कान पकड़कर समझाता वो कि " मीतुआ , ये तेरी जिंदगी नही है रे , अभी तेरा भविष्य बनाने का दिन है " एक फिक्र सी दिखती मुझे उसकी आवाज़ में ...... मेरी जैसी नकचढ़ी लड़की का गुस्सा कभी उसके सामने टिक ही नही पाया ......उसने मेरी आँखों में वास्तविकता का चश्मा चढ़ा कर मुझे हकीकत दिखाया ...... लेकिन मेरी आँखों को तो सपने देखने की आदत पड़ी है , वास्तविकता तो चाह कर भी नही देख पाती हूँ और जब ये आँखे वास्तविकता से उलझती है तो उसकी चकाचौंध से मैं जाने कितने समय तक बेचैन ही रहती है ।!

_________________मीतू -- २९०१२०११ ..००:२० Copyright ©

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Friday, January 28, 2011

कैसी लाचारी !

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अभी कल शाम की ही बात है ----- मैंने एक बच्ची को सिर्फ इतने ही कपड़ो में देखा ... गोद में यूँ ही बच्चे को ली हुई थी .... पेन्सिल बेच रही थी .... जब की हम लोगो को इतनी ठण्ड लग रही है , उसके बदन पर स्वेटर भी न था ... चेहरे पर फिर भी मुस्कराहट .... एक बार मन किया की अपना ही स्वेटर दे दू ... लेकिन फिर मैं उसे ७० रूपए देकर चली आई क्योकि उस समय मेरे हाथ में इतने ही पैसे थे .....इससे ज्यादा कुछ भी नही कर सकती थी मैं .... ग्रीन लाईट हो गयी थी तभी एक आदमी दौड़ता हुआ आया जो की भिखारी था उस लड़की को बुरी तरह से डांट कर पैसे छिनने की धमकी दिया और वो लड़की दर कर भाग गयी ... ..... ये सारा मंजर मेरी आँखों के सामने से गुज़रा .और मैं कहाँ , कितनो का कर सकती हूँ ...... इन बच्चो को देख कर मेरी आँखे भर आती है ...जिस देश में बच्चे कुपोषण का शिकार हो . हम इस सच्चाई को अपने सुन्दर चेहरे की तस्वीरों से कैसे ढँक सकते है ?
..............................................................................

मैंने अक्सर देखा है ------ जब मैं सुबह टहलने जाती हूँ की जो सड़के दिनभर चमकती है उन्ही सडको पर लोगो को आधी रात के बाद कुछ घंटो के लिए अपने थके हुए शरीर को आराम देते हुए ..... इस ठिठुरती हुयी ठण्ड में पशुओ की तरह सिकुड़कर ठण्ड से बचाव करते हुए ...

वो पिछले साल की ही तो बात है जब की हम घरो में सो रहे थे हमारे घर के पीछे ही एक महिला सिर्फ इसलिए बेवा हो गयी की उसके पास न कोई घर मयस्सर था और न ही कोई ठण्ड से बचाव का साधन ....... अक्सर मेरी आँखे उस बेवा को ढूंढ़ती है .... जाने कहाँ चली गयी वो ??

________________________मीतू Copyright ©


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Thursday, January 27, 2011

जागो रे महिला !!!___ जागो रे भारत !!!



Comptroller & Auditor General (CAG) की मार्च २०१० की रिपोर्ट साबित करती है की राष्ट्रीय महिला आयोग संपूर्ण और गंभीर रूप से भ्रष्ट है!
२००८-०९ में आई १२,८९५ शिकयतों में से सिर्फ़ ७,५०९ पर गौर किया गया और उन में से केवल १०७७ पर कार्यवाई के गयी!
जेल में औरतों की दशा का जायज़ा पिछले ६ सालों में एक बार भी नही लिया गया!
बनारस , मथुरा और पश्चिम बंगाल में रहने वाली विधवाओं की दशा भारत में सबसे दुखद है पर भारतीय महिला आयोग को इस बारे मे पता भी नही था जब तक सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को जाँच के आदेश नही दिए थे ! इन विधवाओं के लिए अब तक क्या किया गया ? ऐसी अनगिनत विधवाओं और ग़रीब महिलाओं के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या किया ?
सरे आम मासूम लडकियों के साथ छेड़खानी होती है , महिलाओ के ऊपर एसिड अटैक होते है ... इनके लिए महिला आयोग ने क्या किया ??
राष्ट्रीय महिला आयोग उन महिलाओं की मदद नही करता जिनको असल मे मदद, सहारे और इंसाफ़ की ज़रूरत है... बल्कि यह "नारी सशक्तिकरन" के नाम पर सिर्फ़ लालची और स्वार्थी बीवियों का साथ देती हैं ! क्या इन्हे उन माताओं, बहनों और भाभियों की तकलीफ़ दिखाई नही देती जो स्वार्थी बीवियों द्वारा पुलिस और क़ानून का ग़लत इस्तेमाल करके टॉर्चर की जाती हैं??? यह आयोग आख़िर क्या चाहता है?

इसमे कोई शक़ नही है कि यह आयोग भारत के परिवारों को और समाज को जड़ से उखाड़ना चाहता है!
राष्टीय महिला आयोग को फ़ौरन बंद कर देना चाहिए और हमें समाज की भलाई के लिए कुछ नया सोचना चाहिए!
जागो रे भारत !!!Copyright ©
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http://timesofindia.indiatimes.com/india/Audit-raps-NCW-for-huge-backlog-spendthrift-ways/articleshow/5744075.cms

http://timesofindia.indiatimes.com/india/Status-of-widows-worst-in-West-Bengal-NCW/articleshow/5877882.cms
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Monday, January 24, 2011

यह कैसी राष्ट्र -भक्ति !

-सानिया मिर्ज़ा के पैरो के सामने हमारा तिरंगा !
- कूड़े-कचरे में पड़ा हुआ हमारा तिरंगा !
- इनको माता निर्मला देवी कहा जाता है जिनके चरणों में झंडा पड़ा है .....!!
-यह राष्ट्र गान हो रहा है ... और इन महोदय (लालू जी राबड़ी जी ) को उसके सम्मान में खड़ा होना भी गंवारानही !
-जूते के तले कुर्सियों के निचे कचरे की तरह पड़ा हमारा तिरंगा ...उफ़ !
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------------आज देश प्रेम की बाते बरसाती मेंढक की टरटराहट की तरह हो गयी है ! २६ जनवरी और १५ अगस्तआया नही की वास्तविक दुनिया से आभासी दुनिया तक सभी देश भक्ति की बड़ी-बड़ी बाते करने में जुट जाते हैहर बंदा देशभक्ति के रंग में रंग जाता है .... कुछ लोग तिरंगे का टैटू बनवाते है तो कोई तिरंगे का टोपी पहनता हैतो कुछ लोग अपने गाडियों में ही तिरंगा लगा लेते है इस आभासी दुनिया में भी कुछ अपने प्रोफाइल फोटो मेंतिरंगा लगा रहे हैं तो कुछ पाकिस्तान को कोसने में लगे है और कुछ फेसबुकियो ने ऐसा बवाल मचाया है आजकलकि वे देश कि सारी समस्याओ का सारा निपटारा अभी फेसबुक पर ही कर के दम लेंगे ! इसके ठीक एक दिन बादही यानि कि २७ जनवरी और १६ अगस्त को ही हमें तिरंगा कूड़े या सडको पर फेंका हुआ हुआ नज़र आता है !
----------- आज जब की लाल -चौक पर झंडा फहराने दिए जाने को लेकर इतनी कवायद हो रही है तो फिरहम झंडे के सम्मान के लिए अपने घर से ही शुरुवात क्यों नही करते ?
-------------- मेरे विद्यालय से लेकर मेरे घर के संस्कार भी यही कहते है की इन दोनों ही दिनों में सूर्यास्त सेपहले ही झंडा सम्मान पूर्वक उतार कर रख देना चाहिए ..... मैं पिछले कई सालो से 15 अगस्त और 26 जनवरी केदिन या जब भी दिखता है .. तिरंगे कि प्लास्टिक की झंडियाँ बीनता रही हूँ अपने शहर में ... कुछ लोग हँसते भी हैऔर कुछ बस देखते ही रह जाते हैं और कुछ ऐसे भी होतें हैं जो मेरा साथ देने लागतें है ... ..... हर बार मैं अपनेआस-पास मुहीम चलती हूँ की प्लास्टिक के झंडे खरीदे जाए .... और उसका अपमान होने दिया जाए .... झंडाकोई खिलौना नही हमारा सम्मान है !
पता नहीं हमारे देश के लोगो को अक्ल कब आएँगी ? किसी का खून क्यों नहीं खौलता यह सब देखकर? हम लोगस्वार्थ में किंतने अंधे हो चुके हैं ? जिस तिरंगे की शान के लिए हमारे वीर जवान अपनी जान की बाज़ी लगाने सेनहीं चूके. उस तिरंगे को हमने बिलकुल भी सम्मान नहीं दिया ..!

आइये प्रण करे कि इसी 26 जनवरी से हम प्लास्टिक की झंडियों का प्रयोग नहीं करेंगे और यदि हमको किसी भीस्थान पर ये झंडियाँ गिरी हुई मिले तो इन्हें उचित स्थान पर पहुचाएंगे...

|| भारत माता की जय || वन्दे मातरम ||

मीतू ....Copyright ©
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Tuesday, January 11, 2011

आँखों-देखि !!

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आँखों-देखी !
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मित्रो आज मैं आपको अपने आँखों देखी एक बात सांझा करती हूँ !
पिछले दिनों जब मैं अस्पताल में भर्ती थी मेरे बगल वाली बेड़ पर एक मुस्लिम महिला भी भर्ती थी जो की इन्द्रलोक ( दिल्ली ) से थी , उम्र भी केवल ४५ के आस-पास लग रही थी , उसके साथ ६-७ बुजुर्ग महिलाए भी थी .. नही मालूम मुझे की वे उसकी रिश्तेदार थी या अगल-बगल वाले वार्ड से आती थी !
इतना जमघट देखकर मेरे मन में भी उसकी बीमारी जानने की उत्सुकता हुयी , पूछने पर पता चला की उसका युट्रेस निकाल दिया गया है --- कारण की कॉपर - टी का धागा उसके युट्रेस में सड़ गया था ! बच्चो की संख्या पूछी तो उसने अपने जीवित बच्चो की संख्या ११ बताई जिसमे की ८ नर एवं ३ मादा संतान थी .... मेरे आश्चर्य का ठिकाना नही रहा की "इतनी कम उम्र , इतने ढेर सारे बच्चे , उसके बाद भी कॉपर - टी लगवाई गयी ... नसबंदी क्यों नही ??"
उसके साथ की बुजुर्ग महिलाओं ने बताया की "नसबंदी करने पर हमारे यहाँ जनाज़ा नही उठता है , ऊपर जाने पर अल्लाह-ताला इस गुनाह का हिसाब मांगता है " !
मैंने पालन-पोषण के लिए जानना चाहा तो उन्होंने बताया की "हिन्दू हो या मुसलमान सिर्फ लड़की वाला ही रोता है ... जिनके पास जितने ज्यादा लड़के हो वे उतने ही सुखी होते है और उतने ही तल्लो के उनके मकान बनते जाते है " और इसके लिए उन्होंने अपने अनेक रिश्तेदारों के उदाहरण भी दे डाले !
मैंने उनसे बिंदास पूछा की आप लोगों को शर्म नही आती जब आपकी बहु , बेटी और आप तीनो ही एक साथ गर्भवती हो जाती हो ....वे कहने लगी की " जी इसमें शर्म कैसी , उनको भी अल्ला-ताला देता है और हमें भी !"

मैं सोच में पड़ गयी की जब राजधानी का ये हाल है तो पूरे हिन्दुस्तान का क्या होगा और अगले २० वर्षो में हिन्दुस्तान का चेहरा क्या होगा ?

(ये घटना महज़ एक हफ्ते पहले २६ दिसंबर की है !)

Eyes - seen!
*************
Friends Today I saw his eyes Sanzo do a thing!
...When I was hospitalized last week with my next Ber was a Muslim woman who admitted Indralok (Delhi) was the age, only 45 of the around was looking, elderly women, was also 6-7 with him. . There seems to me they were his relatives or side - had come from the ward!
Seeing such a rally in my mind Huyie curiosity to know his illness, revealed he asked Yutraess has been removed due --- Copper - t thread was languishing in his Yutraess! He then asked the number of children surviving number of children 8 to 11 male and 3 female children which was reported .... Of the whereabouts of my surprise was not "such a young age, so lots of children, then the copper - T Alghaai sterilization was ... Why not??"
The older women told her "corpse not our place to sterilization arises when Allah up - lock the account of crime asks!"
I nurture wanted to know, he told the Hindu or Muslim, only the girl's cries ... The more they're boys who are equally happy and equally Hllo made their house pets, and give examples to put his many relatives!
I asked him to cool you when your multi does not shy people, one daughter and three pregnant with you .... they did say the "live" how the shy, they also Alla - lock gives us too! "

I have been thinking lately if it's the capital of the Hindustan Hindustan face of what will happen in the next 20 years?

( This incident happened just before a week on 26th December ) ­

Friday, September 24, 2010

एक प्रश्न !!


अर्थ है क्या- प्रेम का , आकांक्षा का ...तुम बताओ !
क्या इसे हम प्राप्त करते है निरर्थक आस्था में ,
या की सरिता के निराले बांकपन में ?
--तुम बताओ !

शांत लहरों की अज़ब उत्तेजना का सबब क्या है ?
सिन्धु जल के ज्वार में क्या राज़ है ?
--मुझको बताओ !

रूठ जायेंगे , न मानेंगे युगों तक !
तुम कहाँ हो , कौन हो ?
कुछ तो बताओ ....!!!!!!!!

Thursday, June 10, 2010

वो शख्स किस क़दर था बुलंद


.
.
जरा ये सोच कि वो शख्स किस क़दर था बुलंद ,

जो ज़िन्दगी से कभी हारा नहीं !

बैचैन रहता था विस्तार पाने को ,

उत्सुक रहता था भोर की स्वर्णिम पारदर्शी किरणों की तरह फ़ैल जाने को !

उड़ता रहता था वो पंछी की तरह स्वच्छंद आकाश में ,

रोक नहीं पाता था कोई उसे आत्मसाक्षात्कार से ,

चलते चलते निकल जाता था ,

वो बहुत दूर कहीं ,

जहां कोई किनारा होता नहीं ........

तय करता था वह अपना अनजाना सफ़र ,

केवल खामोश और तनहा ,

बाँध नहीं पाता था कोई ,

सामाजिक बंधनों का बाँध उस पर ..........

नहीं परिसीमन करता था वो उन रिश्तों को ,

जो वो निभा सकता था नहीं .....

जीता था वो तनहा,

करता था वो अपने दिल की !

तभी तो बह नहीं पाया .....

वह वक़्त की बाढ़ में ,

क्यूंकि वह दूर नहीं था

स्वयं से !
..................MEETU.................

Saturday, April 3, 2010

पहली बरसात !!



हवाओं में ये कैसी सिहरन,
धरती से उठी कैसी भीनी सुगंध !
फिज़ाओं में ये कैसा जादू ,
मन में उठने लगा है ज़ज्बात !
शुष्क धरती के होठों की प्यास बुझाती,
मौसम की ये पहली बरसात !

पहली बारिस की मधुर नाद में,
आद्र हों उठा है मन !
ह्रदय वीणा के मौनबद्ध तार को ,
झनझना देते हैं बार - बार !
हवाएं सरगोशी से कुछ कहने सी लगी है ,
ये कैसा नशा है.... कैसा है ये जादू !.....
क्यों धड़कता दिल, हो रहा है बेकाबू !

सांसे थाम कर बैठे हैं हम ,
ये दिल थामकर बैठे हैं हम!
अब तो कह दो, ..कह दो ...
क्यों हों तुम ऐसे,
कि तुम्हे सजदा करने को बैठे है हम
...!!

Friday, February 5, 2010

शादी- शुदा औरत की त्रासदी-



तुम्हे, मेरा दुसरे मर्दों के साथ,
हँसना और बोलना पसंद नहीं है,-
ये समझकर कि मैं तुम्हारी गैर मौजूदगी में,
आवारा घूमती-फिरती हूँ,
तुम अंदर ही अंदर सुलगते रहते हो......

तुम अपने आपको यंत्रणा देते हो, ये सोचकर-
कि मैं तुम्हारे जानने वालो,
और अपने जनने वालो,
और दुसरे तमाम लोगो के साथ,
तुम्हारे खिलाफ बाते किया करती हूँ.....

तुम्हे इस वहम ने पागल कर रखा है-
कि मैं दूसरे मर्दों के साथ जाने क्या-क्या करती हूँ,
महज़ इस ख़याल से -
कि घर वापस आकर तुम्हें न जाने,
किस तरह का मंज़र देखना पड़े ,
तुम्हारे होश गुम हो जाते हैं .......

मेरे साथ रहते हुए, तुम्हारी जिंदगी हजारो -
आशंकाओ में घिरी हुयी हैं,
लेकिन, तुम इतने बुजदिल हो,
कि मेरे बगैर जिंदा भी नहीं रह सकते,
और तुममे इतनी योग्यता भी नही हैं -
कि शादी-शुदा जिन्दगी के योग्य हो सको!!!!!!

Thursday, February 4, 2010

परिंदा और मैं



परिंदा,
पिंजरे के अन्दर,
चारो तरफ गोल-गोल चक्कर लगाया,
उड़ने के लिए पंख फडफडाये-
अफ़सोस उड़ न सका.....
मै साक्षी थी उसकी बेबसी,लाचारी,क्रोध और झल्लाहट की,!
समय के साथ वह
भूलता गया पंख फडफडाना,
समझौता कर लिया था उसने परिस्तिथियों से-
और भूल चूका था कि-
वह परिंदा है उन्मुक्त गगन का ....
हम दोनों में एक ही समता थी ...
परिस्तिथियों से सझौता कर लेने की...
और अपने सामर्थ्य को भूल जाने की........

Sunday, January 31, 2010

"मै हूँ नारी "


मै भी चाहती हूँ -छोटा सा आकाश,

मुझे भी उड़ने दो इन फिजाओं में,

नही चाहती मै बंधन रीति-रिवाजों का,

नही चाहिए मुझे दान भीख का......

मुझे न दो नाम देवी का,

मै हूँ आईना इस समाज का....

मै भी इन्सान हूँ तुम्हारी तरह,

मै भी अधिकारिणी हूँ तुम्हारी तरह ,

नही चाहती कुछ और अधिक -

चाहती हूँ केवल स्वतन्त्र आस्तित्व.........
 

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