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Sunday, July 15, 2012

कमाल की संस्कृति !

गुवाहाटी में मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना के बाद हिन्दू संस्कृति के स्वयंभू ठेकेदारों / पुरोधाओ ने बहुत सारे सुझाव दिए है/ सामने आये है-- जैसे की हम लडकियों को कितने मीटर कपड़ा पहिनने चाहिए ...... कितनी देर तक बाहर रहना चाहिए ..... किसी पार्टी में जाना चाहिए या नही ?
और अगर लड़की इनके द्वारा तय मानक अनुसार न करे तो क्या इन्हें लडकियों के साथ बदतमीजी/छेड़खानी/ घसीटने/सिगरेट से जलाने/बलात्कार करने का अधिकार मिल जाता है ??

मुझे यह समझ में नहीं आता कि ये कौन होते हैं यह तय करने वाले कि कौन क्या पहने क्या न पहने ? क्या ये अपनी धोती/लुंगी/हाफ पैंट /बारमुड़ा हमसे पूछ कर पहनते हैं , जिसको ज़रा सा खींच भर दी जाए तो सारी उतर कर नीचे आ पड़े ..... पहने-पहने भी जिसमें से आधी टांगे नंगी दिखती रहती हैं !!
स्त्रियों के लिए भी ऐसी ही कई अनसिली-अधखुली पोशाकों का प्रबंध हमारी संस्कृति में है.......लेकिन जब हम इनके पोशाकों पर आपत्ति नहीं करते तो इन्हें क्या अधिकार है कि सारे देश के स्त्रियों के लिए खाने-रहने-पहनने-नाचने-गाने का मैन्यू बनाएं ?
क्या हम सबके बाप-दादा देश की सारी स्त्रियों का पट्टा क्या इन्हीं सब उजबकों के नाम लिख गए थे ??

अभी कल एक फेसबुकिया स्वयम्भू विद्वान बकवास कर रहा था की गुवाहाटी में जो कुछ हुआ उसमे सारी गलती लड़की की थी क्योकि उसने कम कपडे पहन रखे थे और देर रात की पार्टी अटैंड कर के लौट रही थी ,, भगवान राम/कृष्ण जी ने भी सूपर्णखा और ताडका का वध किया था !
तो क्या यह अश्लील तुच्छ कार्य करने वाले इन उजबको के अनुसार भगवान् राम/कृष्ण के अवतार है ??

गाँवों में चुड़ैल बताकर मार डाली जाने वाली औरतें, मानसिक रोगों से ग्रस्त,मातों-जागरातों में सिर पटककर झूलने वाली औरतें, वृंदावन/बनारस में आलुओं की तरह ठुंसी विधवाएं, दंगों-पंगों में रोज़ाना बलत्कृत होती औरतें.... अभी कल के समाचार के अनुसार सफ़दर जंग अस्पताल में गर्भवती महिला के साथ बलात्कार ...... इन सबको देखकर इन्हें अपनी संस्कृति पर ज़रा भी शर्म नहीं आती ??
_____________________ किरण ...शाम ८:२६ ..... १५/७/२०१२

40 comments:

  1. mai samjhtahun ki sabko apne dhang se jine ka adhikar hai par jara ye bataiega ki aaj humare samaj me larko ke liye koi kanoon bana hai....... larki jab chahe jaise chahe larko par iljam laga sakti hai aur larka bechara begunah hokar bhi kasoorwar ban jata hai.......tab khan jati hai aapki ye soch.......hum kal bhi nariyon ka ijjat karte the aur humesh karte rahenge par humari government ko sochna chahiye ki ve kiske paksh me faisla de rahe hai.......BHARAT humara desh nhi humara GHAR hai aur ghar me yadi koi aisi ghinona kaam karta hai to use kari se kari saja milni chahiye........

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  2. जी किरन जी मैं आपसे पूर्ण रूप से सहमत हूँ .......इसका गूढ़ समस्या का निवारण सिर्फ डर से ही संभव है, जो कि हमारे समाज से जा चुका !
    http://avermaaa.jagranjunction.com/2012/07/14/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE/

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  3. aise ladko ko sidhe goli marni chahiye jinko apne ghar ke alawa sabhi aurte istemal ki chij najar aati hai aur thodi si pee lene ke bad ye kuchh bhi karne ko chal dete hai is me inke maa bap bhi barabar ke jimmedar hai.

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  4. बिलकुल सही बात ...Kiran ji...कुछ लोग बस समाज को पीछे ले जाना चाहते हैं...नारी को प्राप्त स्वतंत्रता उन्हें रास नहीं आ रही है..बुराइयों का कारण वे बस औरत में देखते हैं...यह तो तालिबानी सोच है कि उनके पहनावे को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है..यह तो समाज को फिर से मध्य युग में ले जाने वाली बात है...हर स्त्री पुरुष स्वतंत्र है...मर्यादा में सबको रहना है लेकिन बंधन ऐसा न डाला जाए कि समाज ही पिछड़ जाए..समाज की आधी आबादी को दबाकर हम आगे कभी नहीं बढ़ सकते हैं..यह एक ऐसी मानसिकता है जिसमे लोग स्त्री को शो पीस और भोग की वस्तु समझते हैं.. महिलाएं जितना अधिक आज देश की प्रगति के पथ पर चल रही है वहीं उनके प्रति अत्याचार व हिंसा के मामले भी बढते जा रहे है..क्योंकि स्त्री को लोग बस भोग कि वस्तु समझते हैं..घर में अपनी माँ बहनों के प्रति उनका नजरिया पवित्र होता है लेकिन घर के बाहर उनका नजरिया बिलकुल बदला होता है..वैसे घर में भी स्त्री सुरक्षित नहीं रही है...समाज की हर इकाई के हर संस्थान में,चाहे वह परिवार हो, शिक्षण संस्थान हो या कोइ भी कार्यस्थल, स्त्री कहीं भी भोग लिए जाने वाली बस्तू समझे जाने से बच नहीं पाती.. ऐसा सिर्फ अपराधी प्रवृति के लोग ही नहीं सोचते बल्कि दूसरे सभ्य दिखने वाले अन्य अधिकांश लोगों की सोच भी कुछ इसी तरह की होती है....ऐसी सोच रखने वाले लोगों की कमी नहीं है इस समाज में जिन्हें सिर्फ यह लगता है कि महिला घर में काम करने व सजा कर रखने वाली एक शो पीस है.वह कैसे दुनिया की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना सकती है.उसकी पहचान तो एक पुरुष के पहचान से ही होगी. जैसे ही वह अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती हैं उसे रोक दिया जाता है, बदनाम किया जाता हैं...यहाँ तक की ऊपर वर्णित अत्याचार भी किया जाता है..पुरुषों के लिए कोई ड्रेस कोड बने या न बने वे स्त्रियों को परदे के पीछे धकेलना चाहते हैं..यह पुरे स्त्रीवर्ग के लिए एक साजिश की तरह है..कपडे तो बस बहाने हैं ..नजरें जब गन्दी होंगी तो कपडे क्या पूरी की पूरी सर से पाँव तक ढकी औरत में भी उन्हें वही नज़र आयेगा जो उनकी नज़रें टटोलती हैं..इसलिए कपडे की बात तो बिलकुल स्त्री पर दोषारोपण की बात है..असल स्थिति तो लोगों की अनैतिक मानसिकता है..यह तस्वीर चिंताजनक होने के साथ ही विद्रुप सामाजिक स्थिति की गवाह है..आशा करें समाज के लोगों में पुनः नैतिकता लौटेगी..उन्हें स्त्रियों में माँ बहन का चेहरा नज़र आएगा और स्त्री का सम्मान हर जगह अक्षुण रहेगा ...इति शुभम !!!.

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  5. great to see that u have courage to write like this in spite of being a woman. we can understand ur pain and i feel ashamed at that incident which occurred in Guwahati. As a male i m astonished how man is being uncivilized in the civilized state.

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  6. सहमत !
    गुस्सा जायज है। जो हुआ वो संस्कृ्ति पर एक कालिख है और कालिख है
    इन्ही संस्कृ्ति के ठेकेदारों के मुँह पर भी ।

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  7. en logo ko fasi de deni chhiye.yadi ka dar nhi hota to me en aasmajik logo ka muder kar deta.
    PLZ... jo ejat ladkiyo ki une rhene do. wo to kam mat karo.....wo aap ki sister he. maa he. whife he.
    JIN KI KOI SISTER NHI HE UNSE PUCHO SISTER KA PYAR KASA HOTA HE. LOVE MY INDIAN CALCHAR.
    SAVE GIRL,,,,then SAVE MOTHER,SISTER,WHIFE

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  8. desh ka bhavishya galat disha ki aur jaa raha hai .
    jago janta jago..... aise logon ko goli maar dena chahiye.

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  9. इस देश को क्या हो रहा है, हम किस समाज की तरफ जा रहे हैं, जिन लोगो ने इस बच्ची के साथ इतना जघन्य अपराध किया इनके तो हाथ काट देने चाहिए

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  10. एक तरफ तो आप ये कहते हैं की हमारा देश लोकतान्त्रिक है और दूसरी तरफ इक्कीसवी सदी मे महिलाओं को कपडे पहनने की भी आजादी नहीं, उससे क्या पता था कि जिस समाज को वह अपना समझती है उसमे कुछ राक्षश भी है, सतयुग हो या कलयुग परन्तु राक्षश प्रजाति हर जगह उपलब्ध है

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  11. badi sateek
    baat likhi hai frnd i appriciate ur felings

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  12. badi sateek
    baat likhi hai frnd i appriciate ur felings

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  13. aise bhahudur logo se mai kahna chhata hu jinnhe aurto,bachho,or kamjoor logo ke dvara ki gai kisi aisi baat se itna gussa aata hi ki itani haivaniyat se unhe saja dekar samaj ko sudharna chhahte hai.
    unhe desh bhar me aatankvadiyo .naxaliyo ke davra ki ja rahi hinsa se khoon nahi khoulta unhe saja dene ke baare me unke dimag kuch nahi aata.
    khuch aise logo ke kaamo se ham apni sansqiti ke baare me nahi shoch sakte aise khuch log hamesa pida hote rahte jo hamesa hi saitan ka prtiniditav karte rahge .
    asie kisi bhi atyachhar ko kisi bhi roop me kabhi bhi sahi nahi kaha ja sakta .aise logo ko kadi se kadi saja di jaani chhahiye.

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  14. ये कुछ पंक्तियाँ मैंने लिखी हैं ..............

    एक समयन्तराल के बाद कुछ विचार मेरे मन मे आयें हैं
    कुछ विशेष घटनाओ ने मुझे इस समाज के वास्तविक दर्शन कराये हैं
    कभी आरोप लगाकर स्त्री पे उसे वन मे भटकना पड़ा है
    कभी स्त्री हट के कारण पुरुष ने 14 बर्ष वन मे बिताए हैं
    कभी हर गए जूएँ मे अपनी ही स्त्री को
    कभी स्त्री के लिए हजारो घरो ने अपने बेटे लुटाये हैं
    क्यूँ हर बार एक दूसरे पे हम आरोप लगाते रहते हैं
    जबकि सही और गलत के नियम भी हम ही ने बनाए हैं
    बनाना है अगर हमे एक सुंदर और सशक्त समाज
    तो करना होगा सम्मान हमे जो मूल हमने नहीं प्रक्रति ने बनाए हैं

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  15. bilkul sahi kaha aapne...par galti un logo se jyada hamari hai jo aisa kaam hote aapni aankhon se dehte rahe par himmat nahi kar paye us ladki ko bacahne ki.....jaisa ki amit verma ji ne kaha ki samaj se dar khatam ho chuka hai logo kuch b kar dete hai par aisa nahi hai dar kahatm nahi hua hai dar bad chuka hai.aaj acche log burai se dar kar he to kuch karne ki himmat nahi dikhate or jo dikhate hai unki hausla badane me doosre log darte hai ..bas isiliye hamare desh me aisi ghatnayein bad rrahi hai...........

    aaj hum shayad phele se kamhjore he ho gaye hai.....jai hind ....jai jinendra

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  16. sahi kaha aapne kiran ji....aache logo ko aage aane ki jarurat hai or ham un ache logo ka sath dene ki, taki ye samaaj k acche thekedaar apni oukaat na dikha paye...jai hind and jai jinendra

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  17. AAJ PATTA NAHE KYA HO GAYA HAI IS YUWA GANRATION KO KYU KE KISI KE BAHAN KE IJAT LUTTAY HUWAI YE NAHE SOCHATE KE HUMARI GHAR PAR BHE MAA BAHAN BETI HAI HUME BHI KISI AURAT NE PIYDA KIYA HAI BURA NA MANE KUCH DOSH LARIKYO KA BHI HAI JUB WO KISI LARKE KO BOY FRIENDS BANNAKAR GUMATI HAI TO WO BHUL JATI HAI KE US KE DOST DEKHTAY HO GE BAKI ..............SUB SAMAJH DAR HAI?

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  18. i think these people should be shoot with the help of sharp shooters coz their mentality can't be change but others will change by this 'MAUT ka DAAR"

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  19. Government of Tarun Gogoi should sack the DGP who said Police is not ATM that they can reach instantly. This utterance itself destroy any confidence left in Police Force & shall encourage offenders further. This insensitive man must not remain in Police Force in service of people. If he is removed Officers down the learn will get right lesson and shall do better. Secondly, the O.C of the Police Station must first be punished and then sacked. Each and every one who had been seen live on camera must be nabbed and punished by a Special Court who must under orders from Chief justice deliver deterrent judgement against all culprits within 60 days. Alka Lamba had been wrongly sacrificed. The victim herself wanted not to hide her face & declared her name. Why she alone be made a scape goat? All young women must learn lessons of Self defence so they may resist at least for a few minutes till help reach them. Good Samaritans must be rewarded so more people come out of their fears and protect helpless women. Swaraj, dr.swaraj@in.com, janamon@journalism.com, probashimon@journalist.com, janamon-tv@in.com

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  20. Aap ekdam sahi hai kam kapde pahanne se ya jyada pahanne se kuchh nahi hota hin bhavna ke purush ya phir yu kahle balatakari purush sirf or sirf havas ke bhukhe hote hai.(inki saza faasi honi chahiye jo hamara desh hone nahi dega)

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  21. ye kusur ladkiyo ke kam kapde pahanne ka nahi balki hamare samaj or desh ka hai, jaha saza ke naam pe sirf maza hai

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  22. kiran ji me aapki baat se sehmat hun aur aapke dard ko bhi samajh sakta hun.me yeh nahi kahunga ki ladkon ki koi galti nahi.tali dono haath se bajti hai ager ladke iske liyen zimmedar hain to ladkiyan bhi baraber ki zimmedar hain.rahi baat ladkiyon ke pehnawe ki to koi bhi dharam aurat ke pehnawe ko achche hi dhang se pesh karta hai.kyun ki aurat ki izzat uske jism ko dhankne me hai na ki khulne me.yeh baat mene is liyen kahi kyun ki meri maa bhi ek aurat hai aur meri behen bhi ek aurat hai aur aap bhi meri behen hi ho.me kabhi nahi chahunga ki aapke ya kisi aur behen ke sath koi na insafi ho.is liyen meri behen is baat ko samajhna zaroori hai ki aurat ki izzat hi uske liyen sabse badi cheez hai isliyen use uski hifazat karni hi hogi aur yeh tabhi hoga jab tan puri tarhan dhaka hoga aurparda kiya jayega yeh meri salah hai zabardasti thopa hua qanoon nahi.lekin is salah me achchai hi hai .allah aapki madad kare.

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  23. Haan hai to sahi.. but isme pariwar walo ke bhi galti hai.. unhe samay pe dekhna chahiye ki hamari bahne or betiyan itni raat tak or itne samay tak baahar kyu rahti hai uska sabse pahle pabandi honi chahiye tab hi iska samadhaaan sambhav hai.. nahi to kal guwahati main hua to aane wale dino main aur v jagah ho sakta hai ...

    N.sanjeev
    9430265368

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  24. किरण जी,हम केवल नारे लगते समय ही महिला आरक्षण की बात करते है, क्या सही में हम इसे स्वीकार करते है,नहीं अरे हम पुरुष तो जितनी गालिया देते है उसमे भी माँ,बहन शामिल रहती है, और जितने बुजुर्गलोग महिलाओ को आशीर्वाद देते है तो कहते है की तेरा चुड़ा(चूड़ी) अमर रहे,तेरी मांग अटूट रहे,तेरे सिंदूर की लाज रहे,अर्थात सारे आशीर्वाद पुरुष को मिलते और सारी गालिया महिलाओ को ये समाज का दोहरा रूप ही समाज के दुःख कारण है!

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  25. A sab kavi khatam nahin hone bala he aur e sab samasya badhti hi jaigi.Iss samasya tavi mita ja sakta javi har ek admi kisi ladies per atyachar hone per o use apni maa,bahen ka jagah denge.

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  26. A sab samasya ka hal nahin hone bala a sab agevi aur badhne lagega ise koivi nahin band kar sakta.Is samasya ko pariman kam kya ja sakta he jab ek ladki ke upr nirjatan karne bala byakti use apni maa ya bahen ka stan de to.

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  27. Is samasya ka kavi hal nahin hone bala aur a nari atyachar aur vi badhte hi jaigi.Mere soch se a smamasya ka hal ho sakta he jab atyachar karne bala byakti is ladies ko agar apne maa ya bahen ka jagah de to

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  28. Is samasya ka hal kavi nahin hone wala a sab nari nirjatna aur baditi hi jaigi.Mere matlab se is samasya ka hal ho sakta he agar atyachar karne wala byakti us ladies ko apne maa ya bahen ka jagah de to

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  29. bilkul aisa nahi hona chahiye sab ko adhikar hai ki woh apni life jiye... or apne hisab se jiye..

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  30. mahilayo ke sath ho rahi hinsa me kapdo ka koi sambandh nahin hai, sabse badi dikkat hai aaj manav ka aur khaskar humahre desh ke manav ka mansik patan hota ja raha hai, apko pata hoga aaj se ek hazar pahle humhari hi sanskriti me aaj se kam papde pahne jate the, lekin tab aisi hinsaye kyoun nahin hoti thi, wo isliye tab manav ke vichar shudhdh the, isliye humhe kosis karni chahiye ki dobara hum apne vicharo ko sudhdh karne ka prayas kare

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  31. bilkul sahi hum ek ajad desa ke ajad nagrik hai or hum kisi ke jine ke dhang par pabandi nahi laga sakte hum sabhi chahe wo M/f sabko apne tareke se jine ka adhikar hai. or log is tareke par pabandi lagana chate he unki soch bahut chhoti hai. yadi samne wala galat hai bhi to kisi ko bhi ye adhikar nahi mil jata ki wo bhi galat kare.

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  32. .लडकी मतलब ये नही की समाज से कोई सरोकार नही,अगर पुरूष के लिऐ संयम आभूषण हैं तो स्‍त्री के लिऐ मर्यादा भी जरूरी हैं ये लडकी रात निकर पहन कर बार के पास भटक रही थी .इससे पहले ये अन्‍दर के एक बूथ में लडाई करके निकली थी,
    सच तो ये हैं जब तक मोबाइल रिचार्ज होता रहे तब तक टीनएर्जस फैंण्‍ड‍शीप नही तो वहशी...मनोविज्ञान कहता हैं कि कुछ लोग अश्‍लील पोस्‍टर फाड कर अपना राजनैतिक कद बढातें हैं ,कुछ देख कर उतेजना कम कर लेते हैं .....

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  33. yes now in India all are free to do any things, wear any thing then how they prohibited to wear these type of cloths. sabko apne tareke se jine ka adhikar hai. Logon ko apani mantility change karni padagi.

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