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Thursday, June 10, 2010

वो शख्स किस क़दर था बुलंद


.
.
जरा ये सोच कि वो शख्स किस क़दर था बुलंद ,

जो ज़िन्दगी से कभी हारा नहीं !

बैचैन रहता था विस्तार पाने को ,

उत्सुक रहता था भोर की स्वर्णिम पारदर्शी किरणों की तरह फ़ैल जाने को !

उड़ता रहता था वो पंछी की तरह स्वच्छंद आकाश में ,

रोक नहीं पाता था कोई उसे आत्मसाक्षात्कार से ,

चलते चलते निकल जाता था ,

वो बहुत दूर कहीं ,

जहां कोई किनारा होता नहीं ........

तय करता था वह अपना अनजाना सफ़र ,

केवल खामोश और तनहा ,

बाँध नहीं पाता था कोई ,

सामाजिक बंधनों का बाँध उस पर ..........

नहीं परिसीमन करता था वो उन रिश्तों को ,

जो वो निभा सकता था नहीं .....

जीता था वो तनहा,

करता था वो अपने दिल की !

तभी तो बह नहीं पाया .....

वह वक़्त की बाढ़ में ,

क्यूंकि वह दूर नहीं था

स्वयं से !
..................MEETU.................

15 comments:

  1. "तभी तो बह नहीं पाया .....
    वह वक़्त की बाढ़ में ,
    क्यूंकि वह दूर नहीं था
    स्वयं से !"
    पते की बात - शब्दों और भावों का अच्छा मंजस्य

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन !!!

    लिखते रहे । स्वागत है ।

    ReplyDelete
  3. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  4. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

    ReplyDelete
  5. bahut hi achhi rachana hai meetu ji. congrats

    ReplyDelete
  6. वो बहुत दूर कहीं ,

    जहां कोई किनारा होता नहीं ........

    तय करता था वह अपना अनजाना सफ़र ,

    केवल खामोश और तनहा ,

    बाँध नहीं पाता था कोई ,

    सामाजिक बंधनों का बाँध उस पर ..........

    नहीं परिसीमन करता था वो उन रिश्तों को ,

    जो वो निभा सकता था नहीं .....

    जीता था वो तनहा,
    वाह बहुत सुन्दर लिखा है।

    ReplyDelete
  7. मनभावन रचना, दिल को छू जाने वाली रचना,
    अति सुन्दर, सटिक, एक दम दिल कि आवाज.
    कितनी बार सोचता हु कि इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है.
    अपनी ढेरों शुभकामनाओ के साथ
    shashi kant singh
    www.shashiksrm.blogspot.com

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  8. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    ReplyDelete
  9. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
    जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !

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  10. Bhavon kee behatareen abhivyakti.

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  11. बहुत प्रभाव शाली रचना...लिखती रहें...
    नीरज

    ReplyDelete

 

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